Monday, 31 July 2017

एक तेरे आने से पहले;एक तेरे जाने के बाद.....


"गुण प्रत्यक्ष नहीं होते;आश्रय और परिणाम प्रत्यक्ष होते हैं।" कुछ वर्ष पूर्व आचार्य शुक्ल के इतिहास  के पन्ने उलटते समय जब मेरी नज़रें इन पँक्तियों पर ठहरीं तब शायद मेरे पास इसका  जीवंत उदाहरण मौजूद नहीं था किंतु 31 जुलाई 2017 को विद्वज्जन और शोधार्थियों से खचा-खच लबरेज़ सभागार में जब मैंने इस आलोचक को सुना तो मैं दंग रह गया।"भारतीय संस्कृति के उन्नायक तुलसीदास" विषयक इस संगोष्ठि में क्रमवत आते दीर्घायु विद्वजनों की झड़ी में जहाँ तुलसी का परंपरागत महिमामंडन कर -
              "सियाराम मय सब जग जानी
                कराऊँ प्रणाम जोरि जुग पानी।।"
तथाकथित स्कॉलरों  को हमेशा की तरह सुनाया जा रहा था वहीं इस बीच एक नए चेहरे ने मानो ध्यानमग्न मुद्रा बनाये बैठे शोधार्थियों को हल्की सी थपकी लगा दी ।
   "मित्रों S S S S" के आवहान से इस आलोचक महोदय ने परंपरागत गर्द जमीं मानसिकता की परत को मानों चीरा लगा दिया और कहा -"तुलसीदास हिंदी के विश्वविद्यालयी कवि हैं ही नहीं "इन्हें किसी विश्वविद्यालय ने कवि नहीं बनाया ,बनाया है तो सिर्फ और सिर्फ इनके जागतिक बोध ने!यही बात है कि तुलसी का काव्य आज भी किसी प्रकाशक की दुकान का मोहताज़ नहीं है।
     आपको बता दें प्रो.चन्दन कुमार इससे पूर्व भी अपने साक्षात्कारों में स्वीकार  चुके हैं कि :-"पूरी बेबाकी के साथ मैं कहना चाहूँगा कि हिंदी साहित्य की दुनिया में महान साहित्यकार बनाने की 'ग्रेट मैनुफेक्चरिंग फैक्टरी' चली !जहाँ आप तमाम तरह के वामपंथी संगठनों के सदस्य बनिये,किसी जनसंस्कृति मंच का हिस्सा बनिये और रातों-रात आड़ी - तिरछी लाइनें लिखकर महान बन जाइए, आप विश्वविद्यालयों के पाठ्यक्रमों में पढाये जायेंगे और आप पर सैकड़ो पन्नों के शोध लिखे जाएँगे।"
                    तुलसी के काव्य की सार्थकता पर बात करते हुए इन्होंने कहा -"कविता की परम सार्थकता काव्यपाठ के जीवन पाठ बन जाने में है "तुलसी का रामराज्य इन जागतिक समस्यायों का आदर्श समाधान प्रस्तुत करता है इसीलिए यह इतने वर्षों बाद भी इस सभागार में याद किया जा रहा है!
      तुलसी की भाषा पर बात कर प्रो.चन्दन कुमार ने इनकी भाषा को "भागीदारी की भाषा"  कहा जो तत्कालीन 15वीं शताब्दी के  अस्थिर धार्मिक-राजनीतिक समाज की समस्याओं को उकेरती है। मेरा मानना है यह उन आलोचकों के लिए एक बड़ी 'चपत' है जो तुलसी की भाषा को कोट करते हुए उक्त दोहा उध्दृत कर-
         "संस्कृत है कूप जल
                        'भाखा' बहता नीर ।।"
 सन्दर्भ समझे बिना ही तुलसी की समग्र मानसिक छानबीन एक्स-रे मशीन की तरह कर डालते हैं।
  मुख्य वक्ता के अनुसार -"तुलसी का काव्य 16-17 वीं शदी के गार्हस्थ-बोध का साक्षी काव्य है ।" यह वह काव्य है जहाँ बन्दर-भालू जो स्वयं राक्षसों का भोजन हैं वह खुद हिम्मत कर राक्षस कुल का विनाश करने में सफल होते हैं अर्थात तुलसी का काव्य-"राजसत्ता के बरक्श समाजसत्ता के संगठन"का काव्य है। आपको बता दें यह वही आलोचक है जिन्होंने अपने लेखों ,साक्षात्कारों में लगातार "थर्ड रेट पॉलिटिकल कॉनससनेस ","हिंदी के विश्वविद्यालययी पाठ्यक्रमों पर विचारधारा विशेष की निरंकुशता",ग्रेटनेस के भूर्भुराते विश्वविद्यालययी स्ट्रक्चर", के प्रति कड़ा विरोध दर्ज कराते हुए साहित्य के नए "फेब्रिक" को बुनने की माँग की है।
       इस आलोचक ने अपने भाषण में  विचार रूड़ताओं  के पुजारियों को जहाँ चपत मारी वह वहीं बैठा सहलाता नज़र आया!अंत में आलोचक के ख़ेमे से बाहर आकर प्रोफेसर चन्दन कुमार ने बतौर एक शिक्षक "स्टूडेंट एम्पावरमेंट" की बात करते हुए गुजारिश भी की:-" जरूरत है कि हिंदी का शिक्षक और विद्यार्थी बदलते समाज के अनुरूप ढले" जिसे शुक्ल ने वास्तविक साहित्य का इतिहास माना था:-'साहित्य-परंपरा के साथ जनता की  परिवर्तित चित्तवृत्तियों का सामंजस्य दिखाना ही साहित्य का इतिहास कहलाता है।"
             यह आलोचक एकनिष्ठ भाव से ताकती हज़ारों आँखों को जाते-जाते मानों यह सीख देने का प्रयास भर कर गया कि:-साहित्य समाज के भदेसपन की व्याख्या नहीं बल्कि हमारी अतृप्तियों का विस्तार है।"
          पूर्ण आश्वस्ति से कह रहा हूँ कि भले ही यह आलोचक अपनी अतृप्तियों के विस्तार को स्रोताओं के 'मानस' में जज़्ब कर कर गया हो लेकिन इसके बरक्श निश्चित रूप से यह अनेकों जिज्ञासुओं के प्यासे कंठ को भी अपने विचारों से नर्मित कर गया ।

:-विवेक शर्मा

Sunday, 22 January 2017

India vs England ODI series

Heading :- रोमांचक मैच के साथ सिरीज का अंत ।
Sub-heading :- भारत ने वनडे सृंखला 2-1 से जीती ।
भारत और इंग्लैंड के बीच वनडे सीरीज के आखिरी मुकाबले मे इंग्लैंड ने भारत को 5 रनो से हराकर सीरीज क्लीन स्विप से बचा लेकिन 2-1 से हार गए ।
रोमांच से भरपूर :- सीरीज के तीसरे और आखिरी वनडे मैच मे 321 के विशाल लक्ष्य का पीछा कर रही भारतीय टीम को जीत के लिए आखिर ओवर मे 16 रन चाहिए थे, केदार जाघव ने पहली दो गेंदो मे छकका और चौका लगाया लेकिन टीम को जीत नही दिला सके और टीम 5 रनो से हार गई ।
इंग्लैंड की शानदार बल्लेबाजी :- इससे पहले टाॅस हारकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी इंग्लैंड की शुरुआत अच्छी रही ओपनर जेसन राॅय ने 65 रन बनाए पहले विकेट के लिए 98 रन जोड़े । इसके बाद कप्तान मोगॅन, जौनी बेरिसटो और बेन स्टोकस के शानदार बल्लेबाजी से टीम 320 के स्कोर तक पहुंच सकी ।
भारत की खराब शुरुआत :- 321 रन के विशाल लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही । ओपनर अजिंक्य रहाने  (1), ओर केएल राहुल  (11) सस्ते मे आउट हो गए । पुरी सीरीज मे भारत की ओपनिंग खराब रही ।
जाघव का कमाल :- खराब शुरुआत के बाद कप्तान विराट कोहली ने टीम को संभाला और  (55) रन की पारी खेली । 175 रन पर आघी टीम पैवेलियन लौट चुकी थी, इसके बाद हार्दिक पाड़या(55) और केदार जाघव(90) ने ने टीम को संभाला और टीम को स्कोर के करीब ले गए । सीरीज के पहले वनडे मे भी केदार जाघव ने शतक जड़ कर टीम को जीत दिलाई थी ।
टी20 की तैयारी :- टेस्ट और वनडे सीरीज मे भारत से बुरी तरह हारने के बाद इंग्लैंड अब भारत के खिलाफ 26 जनवरी से शुरु हो रही 3 टी20 मैचो की सीरीज खेलेगी । जिसका पहला मैच कानपुर मे 26 जनवरी को खेला जाएगा ।

प्रकृति का हनन

प्रकृति और मनुष्य का ऐसा शाश्वत संबंध है जिसे कभी भी अलग-अलग करके नही देखा जा सकता फिर भी मनुष्य प्रकृति के चक्र को निरंतर ध्वस्त करता चला जा रहा है । जाने-अनजाने प्रकृति के साथ खिलवाड़ करते रहने के कारण मनुष्य एक ऐसे मोड़ पर आ खड़ा हुआ है जहाँ वह प्रकृति के असंतुलन के लिए चिंतित तो होता दिखाई देता है लेकिन उसके समाधान के लिए अग्रसर होता दिखाई नही देता । पिछले कुछ वर्षो मे जैसे जैसे दुनिया की जनसंख्या बढी है वैसे ही प्रकृति पर भी प्रभाव पड़ा है । पर्यावरण को गर्म करने वाली विभिन्न प्रकार की गैसों का उत्सर्जन अपेक्षा से अघिक बढ गया है । विकास के नाम पर पूरे विश्व मे एक होड़ सी लग गई है जिसके लिए प्रकृति को नजरअंदाज करके मनुष्य दिनोंदिन सुख सुविघाओ के साधनो को जुटाने मे लगा रहता है । भूमि की उपज मे जो कमी आई है उसके लिए भी पर्यावरण का असंतुलन ही कही ना कही जिम्मेदार है । इसका जलवायु पर भी इतना गहरा प्रभाव पड़ा है कि आज हिमालय ग्लेशियर तेजी से पिघलते जा रहा है ओर समुद्र का जलस्तर बढता ही जा रहा है इसके अलावा दूसरी ओर नदियो का जलस्तर, गर्मी बढ़ने के कारण घटता ही जा रहा है । इन सभी समस्याओ से उबरने के लिए आवश्यक है कि विश्व का हरेक व्यक्ति इस बात के प्रति सचेत व सजग रहे कि प्रकृति यदि हमारे विकास के लिए वरदान है तो वास्तविक महत्व को समझते हुए उसके द्वारा दी गई प्राकृतिक संपदाओ कि हम रक्षा करे । साथ ही विकसित देशो को भी सोचना होगा कि वे प्रदुषण संबंधी सभी कारणो से अवगत होकर विकास के क्षेत्र मे महत्वपूर्ण कदम उठाए । विश्व के सभी देशो को मिलकर प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने मे एक साथ मिलकर कदम उठाना होगा ।

Monday, 16 January 2017

स्वस्थ शरीर स्वस्थ मष्तिष्क

किसी ने ठीक ही कहा है कि 'स्वस्थ शरीर मे ही स्वस्थ मष्तिष्क का निवास होता है ।' मानव जीवन एक झरने के समान है । जिस प्रकार झरने का जीवन पानी है उसी प्रकार मानव के जिवन का आधार उसका स्वस्थ रहना है । इसलिए शरीर के सभी अंग  ठीक प्रकार से चलते रहे उसी का नाम स्वस्थ है । स्वस्थ मनुष्य चाहे जितना भी गरीब क्यो ना हो वह सुखी जीवन जी सकता है जबकि अमीर व्यक्ति सभी साधनो के बावजूद यदि अस्वस्थ रहता है तो उसे अपना जीवन नीरस और विरान लगता है । वह जीवन का एक एक पल गिन गिनकर काटता है । इसलिए व्यक्ति को चाहिए कि आजकल की भाग-दौड़ भरी जिंदगी मे वह अपने स्वास्थ्य का विषेश रूप से ध्यान रखे ।
आज का व्यक्ति शारीरिक बिमारियो के साथ-साथ मानसिक रूप से इतना ज्यादा तनावग्रस्त है कि उसके पास सुख सुविधाए के होते हुए भी उदासी और अकेलापन से घिरा रहता है । स्वस्थ जीवन को रसमय जीवन बनाना तभी संभव हो पाएगा मनुष्य कुछ महत्वपूर्ण बातो को अपने जीवन का अंग बना लेगा; जैसे - पौष्टिक और संतुलित आहार का सेवन, स्वच्छ वायु मे कुछ समय बिताना, नियमित परिश्रम करना, व्यायाम करना आदि ।
स्वस्थ रहने के लिए उसे हर प्रकार के अति से बचना होगा - जैसे :- अतिरिक्त खाना, अतिरिक्त जागना आदि । अनियमित जीवन शैली को छोड़ना होगा और अपने स्वास्थ्य पर घ्यान देना होगा । धुम्रपान, मदिरापान आदि से दूर रहना होगा । आज विश्व स्तर पर स्वास्थ्य संबंधी बड़े बड़े अभियान चलाए जिते है क्योंकि यह सच है कि किसी भी राष्ट्र का विकास उसके स्वास्थ्य नागरिको पर ही निर्भर करता है। इसीलिए हमारा यह कर्तव्य है कि हम स्वस्थ रहे और देश की सेवा करते रहे ।

खेलो का महत्व

आज मनुष्य खेल के महत्व को नकार के नही चल सकता । आज के युग मे खेल, जीवन की नियमित आवश्यकता बन चुका है । खेलता हुआ बालक ही हमे सबसे अधिक भाता है । उसकी यही खेलकूद वाली गतिविधि उसकी मांसपेशियो को निरंतर सशक्त और पुष्ट बनाने मे सहायक होती है । खेल हमारे जीवन को सदैव प्रसन्न बनाए रखते है । ये हमारे तन और मन दोनो का समुचित विकास करते है । खेलने से शरीर मे चुस्ती बनी रहती है । जिस प्रकार हमारे मानसिक विकास के लिए शिक्षा की आवश्यकता होती है उसी प्रकार स्वास्थ्य शारीरिक गठन के लिए खेल भी आवश्यक है । खेलो के माध्यम से व्यक्ति विशेष मे क्षमा, दया, स्वाभिमान, आज्ञा-पालन तथा अनुशासन जैसे उच्च गुणो का समावेश होता है ।
हालांकि पहले के समय मे लोग खेलो को इतना महत्व नही देते थे । उनके अनुसार खेल समय की बर्बादी का जरिया था लेकिन आज हर व्यक्ति का दृष्टिकोण बदल चुका है । आधुनिक समाज खेल की उपयोगिता से अवगत है । आज लोग खेलो मे अपना कैरियर भी बनाने लगे है । आज खेलो की दुनिया मे सचिन तेंदुलकर, पेले, सानिया मिर्जा, साक्षी मलिक, विराट कोहली आदि जैसे अनेक ऐसे नाम है जो आज के युवा वर्ग के लिए मिसाल बनकर उपस्थित हुए है । खेलो के द्वारा ही व्यक्ति रंगभेद, जाति, धर्म आदि बातो को भुलाकर भावनात्मक रूप से एक दुसरे से जुड़ता चला जाता है । यही खेलो का सही महत्व है ।

Friday, 30 December 2016

Memorable sports year 2016

Today's the second last day of the year 2016 and this year Indian sport had got lots of achievement.
In rio Olympics PV.sindhu, sakshi malik and deepa karmakar gives proud feelings for our country. In cricket virat kohli and his team constantly win 5 test series and build record of 18 matches win without loosing. India had only one country who never lost test match in year 2016. Some achievements in year 2016:-
=> In Rio, Olympic sakshi malik won 1st medal for our country :-
In rio,  wrestler sakshi malik won 1st brownch medal for India. Sakshi defeat Isulu tinibekova (kigristan) in the 58 kg freestyle playoffs.
=> silverqueen PV.sindhu :-
Women badminton player PV.sindhu have won 1st silver medal for India. She was a first lady to won silver medal for India in Olympic games. She lost close final against carolina marine (Spain).
=> Jimnastic player deepa karmakar:-
Deepa karmakar achieved fourth rank in Jimnastic for India in rio Olympic 2016.she was a first Indian lady who played the finals in Olympic Jimnastic.
=> Four players had won khel ratan award :-
PV.Sindhu, sakshi malik, deepa karmakar had won rajiv gandhi khel ratan awarde by the performance of rio Olympic and shooter Jitu rai had won award by international level performance.
=> India won 4 medals in Rio para Olympic games :-
There are 19 players participated in rio para Olympic games, and got 4 medals. Devendra jhajaria won gold medal in javallian throug, mariyappan thangavelu won gold in high jump and varun Singh bhati won brounch medal in this game and deepa malik won silver medal in short puts.
=> India perform better in ODI's and T20 matches :-
India have won Asia cup in limited over cricket. India won one day series 3-2 against new Zealand but lost against Australia 1-4. In home India lost T20 world cup semi finals against West indies.
=> Clean sweep against Australia :-
In the captainship of Mahendra Singh Dhoni the starting of year 2016, India lost one day series against Australia but India comes back and won T20 series 3-0 and won one day series 3-0 against Zimbabwe.
=> T20 Asia cup champions:-
India won Asia cup final by 8 wickets against Bangladesh and junior team was also won against Sri Lanka and won U-19 Asia cup.
=> IPL Champion sunrisers Hyderabad :-
Sunrises Hyderabad defeat Royal challengers Banglore in IPL final 2016. Virat kohli score unbelievable record 973 runs in a season 2016.
=> Ranji Champion Mumbai :-
In Ranji trophy Mumbai won record  41th time national championship. Mumbai defeat final against saurastra by a innings and 21 runs.
=> unbelievable record in test cricket :-
 In the captainship of virat kohli India have won constantly 3 series in year 2016. India had only one country who never lost test match in year 2016.
● India won constantly 18 matches without loosing in 5 test match series.
● India built record to won a 9 test match in year 2016.
● Virat kohli made 1215 runs in 12 test match by the average of 75.93 in this year. He tons 3 double century in last 3 series.
● In the end of year India got the ranking of 1st position in test cricket. 

Thursday, 22 December 2016

Vijendera Singh vs Francis Cheka: 8th consecutive win of Indian Golden-boy

Vijendera Singh vs Francis Cheka: 8th consecutive win of Indian Golden-boy



Trailblazer always sets examples for their challengers- this is what Vijendra singh has done in their boxing career. Although India has huge fan following for Cricket but when it comes to boxing a name- vijendra singh continually hovers in our minds because his past performances never disappointed us whether it was professional boxing or in Olymipic.
An alteration from winning an Olympic bronze medal to professional boxing has proved his unmatched swag.
Vijendra, who has won seventh profession combat in a row but everyone, knows warriors like challenges this is what happened when he defeated Australian Kerry Hopes in July this year in New Delhi, after crossing this stumbling block he takes on the Intercontinental Super Middleweight champion Francis Cheka on December 17 at the Thyagraj stadium in the national captital. For this combat he had trained himself very hard in Manchester for the next opponent and this helped a lot in boosting up his confidence.
On asking about his past experiences with another opponents like kerry, Vijendra answered in original tone-“I’m a professional boxer and I have experience and my country India is with me. As I had knuckled my previous opponents as my one punch will be enough for Francis cheka,”he said.
Vijendra, who holds the WBO Asia Pacific super middle weight title- his recent performance is a presentation for his bright future and which has also prompted his rivalry Former WBF world champion Cheka to dig at him.
A stadium full of Indian flag instigated a mutated power in the hands of Vijendra whose punches affected the body as well as the soul of Cheka. Cheka who is known for playing mind game and vocal in the ring had proved to be wiped out because the cheering for Indian Golden boy had muted the opponent’s vocal out there.
Having a professional career span of 17 years now and also have his name is counted with other big names like Paul Smith, Matthew Macklin and Fedor Chudinov. Cheka is a veteran of 43 fights and has 32 wins, 17 of them coming by way of knock-outs. But these numbers will not bog down Vijendra, who dismisses his opponent claims and achievement with   nonchalance.
“I will try to continue my winning chase. I have a 7-0 record and I am sure it will be 8-0. I have trained hard and worked a lot on my techniques. All I want to say that I am ready.
Stadium was full with the chant of –Viju-Viju Viju. For the support and cheering up celebrity as well as politicians was there like- Sushil Kumar, Yogeshwar Dutt and Kirren Rijju but the presence of Ram-Dev baba stole the show among them. And then Cheka enters in to the ring,do an African sway, and then petroleum jelly was applied by his Tanazanian crew. Vijendra is famous for his upper cuts and slowly dominates and never try to be in haste. Finally the Indian hero enters- stadium was full with the chants-‘vee=jeeennn-darrr-“vii-jee-nn-derr” and then the hood was removed.

The Tanzanian national anthem began with a few Tanzanians in the crowd getting into the mood. The Indian anthem had the crowds singing along. This was a fight they had been waiting for and nationalistic fervor added to the occasion. Saina Nehwal, who reached the quarterfinals at the Beijing Olympics when Vijender picked up a bronze, tweeted: “We know you can do it once again. Don’t show any mercy!”

Both the boxers were in their corners as their men bellowed last-second instructions.
It was time for the boxers to extort some fear as the fans screamed for the fight to begin. At the bell, the boxers didn’t charge in but circled each a few feet from each other. Vijender, enjoying a height advantage 183 to Cheka’s 179 still had his guard on as the African crouched low, trying to find an opening. They circled like birds of prey – for the screaming fans at the Thyagraj stadium, there was only one prey – Cheka.

Cheka had won 32 of the 43 bouts in his career. Experience was on his side, even though he had never won outside the African continent. The second round began as the mist cleared around Cheka’s head. Shaking his head he came into the middle of the ring and began his crouch, a slightly unorthodox approach when fighting an opponent known for his reach and safety-first tactics. Vijender kept circling him as his corner yelled ‘go in.’ Cheka swung and missed, Vijender deftly stepping away before coming in with another right to the African’s head before Cheka thought it prudent to go into a clinch. The crowd bayed – VIIJEENDEERR.

Something told Vijender before the start of the third round that Cheka isn’t going to come out and trade punches or relax his guard. Cheka’s gum shield was loose and in that moment for a micro-second, the African tottered. Vijender pointed to the referee; most thought he was pointing to the loose gum shield. The referee took one look at Cheka and declared the fight over. The fans hadn’t even settled down and the African who promised so much through his words was ready to fly back. Vijender’s pre-fight prediction “I will put him down with one punch" had come true.
In fact, going back to the changing room was more of a challenge. Vijender had to wade through the crowd; some held onto him, touched him and one fan hugged and didn’t let go till he was forcibly pried out.
After the bout, Vijender said, “I did fall for all that Cheka was saying in the media. A few people in my group did ask me to be careful. But after the first round, I had his measure and then I sorted him out.” In fact, in the middle of the second round, after landing one straight to the face, Vijender did a bit of show-boating, one leg tucked behind the other as he gleefully smiled at Cheka. The crowd roared.
It was Vijender’s eighth consecutive win in professional boxing and second at home; also his seventh knockout in eight bouts. “Two months of training in Manchester has done me good,” said the Indian champion, "I am happy and I believe in punch-power.”
Vijender dedicated his win to the martyred Indian soldiers. His next bout and opponent should be up in six months’ time, probably taking place in China or Dubai. The word ‘biopic’ was thrown in as Vijender smiled. “I keep on repeating ‘Picture abhi baaki hain mere dost’. It’s not the end for me right now, and when I retire that would be the time for a biopic to be made on me. So, I don’t think so, it’s the right time as I haven’t ended my career now.”


Sunday, 18 December 2016

जूनियर हॉकी विश्व चैंपियन: बेल्जियम को 2-1 से रौंदकर भारत बना विश्व चैंपियन
चक दे इंडिया के नारों...के बीच  भारतीय टीम ने 15 साल बाद जूनियर हॉकी विश्व  चैंपियनशिप की ख़िताब जीत लिया है। अजेय रथ पर सवार  हरजीत सिंह की टीम ने रविवार शाम को लखनऊ के गोमतीनगर स्थित मुहम्मद शाहिद स्टेडियम में फ़ाइनल मुकाबले में बेल्जिम को 2-1 से मात देकर विश्व ख़िताब जीत लिया है। इससे पहले भारत ने 2001 में होबार्ट में अर्जेंटीना को हराकर प्रथम बार ख़िताब जीता था। भारतीय टीम ने सघन शुरुआत पहले से ही कर दी थी। खेल के आठवें मिनट से ही गुरजंट सिंह के फील्ड गोल से भारत ने  बढ़त बना ली थी। इसके बाद 22 वें मिनट में भारत के  सिमरनजीत सिंह ने गोल कर 2-0 की बढ़त दिला दी । तभी लग रहा था कि भारत इस मैच को आसानी से जीत लेगा और ऐसा ही हुआ। अंत में खेल के 70वें मिनट में बेल्जियम को पेनाल्टी कॉर्नर मिला, जिसे  फेब्रिस वान ने गोल में तब्दील कर हर का अंतर 1-2 कर दिया। खेल की अंतिम सिटी बजते ही भारतीय खिलाड़ी तिरंगों में दौर पड़े और इसी के साथ भारत  दूसरी बार जूनियर हॉकी विश्व चैंपियन बन गया।
 रूपेश रंजन मिश्र "बिहारी" .


8.11.16 बनाम 6.6.66 और 1.7.91

यदि प्रधानमंत्री वाकई में  डिमॉनेटाइजेशन के जरिए देश की आर्थिक हालात को सुधार लेते है तो वो आधुनिक युग के पहले प्रधानमंत्री होंगे जो सुधार की बुनियाद को ही बदल डालेंगे। अगर प्रत्यक्ष की बात करें तो विश्व में ऐसे कुछ उदहारण हैं जिन्होंने देश कि आर्थिक, विकास  मानचित्र को ही बदल डाला था ।  श्याओपिंग 1978-84 के  सुधारों के बाद चीन में रोनाल्ड रीगन 1981-89 के जरिए अमेरिका में, मार्गरेंट थैचर 1979-90 के जरिए ब्रिटेन में और 1991से 1995 के  सुधारों के बाद भारत में नज़र आई। भले ही दौर बदल गया हो परंतु स्थिति सामान जैसी ही है। देश में आज काला धन के कारण देश की हर तीसरे घर को रोटी के लिए सोचना पड़ रहा है। मोदी जी की पहल कहीं न कहीं सही है क्योंकि देश को आर्थिक स्थिति में सुधार व्  विश्व व्यापार श्रेणी हो या सकल घरेलू उत्पाद की आय या निम्न आय को सुधारने के लिए  कालाबाज़ारी पर अंकुश लगाना अनिवार्य था । हम अगर पिछले 60 साल की लेखा जोखा की समीक्षा करें तो देश की आर्थिक स्थिति बीजेपी की सरकार में ही  संभली है ये तो हक़ीक़त है। चाहे वो अटल जी का दौर हो या वर्तमान प्रधानमंत्री मोदी जी का इन दोनों की दौर में सकल घरेलू उत्पाद की दर 7. के पर गई जो अन्य की दौर में 6 से नीचे ही रहती थी। हम मान लेते है कि बीजेपी की शासन प्रणाली उम्दा है । लेकिन सरकार के सामने अभी प्रतिस्पर्धा कम नहीं है। ये वही देश है जहां डिमॉनेटाइजेशन जैसी विधवत प्रक्रिया पूर्व असफल हो चुकी है..हाँ!  गनीमत रहा कि 1जुलाई 1991 को जब प्रधानमंत्री नरसिंह राव जी जब रुपए को अवमूल्यन किए तो उन्हें सफलता मिली वैसे चुनौती कम नहीं थी उनको भी। दरअसल, 6.6.66 को प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने रुपए का 35.5 फीसदी अवमूल्यन किया । लाल बहादुर शास्त्री के निधन के बाद प्रधानमंत्री बने और इन्हें प्रधानमंत्री बने कुछ ही समय हुए थे , देश आर्थिक संकट से जूझ रहा था । इंदिरा गांधी को लगा की इससे विदेशी पूंजी आएगी जो हुआ नहीं और ये बड़ी भूल साबित हुई । लेकिन वर्तमान प्रधानमंत्री  के द्वारा किए गए फ़ैसले कितने सही या गलत होंगे ये तो वक़्त ही बताएगा फ़िलहाल संघर्ष की पटरी पे देश चल रही हैं। आशा करता हूं कि  डिमॉनेटाइजेशन सफल साबित होगी।

रूपेश रंजन मिश्र "बिहारी".


Thursday, 15 December 2016

पी वी सिंधु : मोस्ट इम्प्रूव्ड प्लेयर

रियो ओलम्पिक में रजत पदक विजेता पी वी सिंधु को बैडमिंटन महासंघ ने अपने खेल में  सबसे ज्यादा सुधार करनेवाली खिलाड़ी के पुरस्कार से नवाजा है ।यह पुरस्कार इसी साल से शुरू किया गया है और सिंधु इसे जीतने वाली पहली खिलाड़ी बनीं हैं । अभी सिंधु विश्व रैंकिंग में 10 वें नम्बर पर हैं । इससे पहले उन्होंने चीन में अपने करियर का पहला सुपरसीरीज टाइटल अपने नाम किया।पुरस्कार मिलने के बाद सिंधु ने कहा -" दुबई में मौजूद होना बहुत  अच्छा है।........... इसे अवार्ड को पाने की मैंने कोई उम्मीद नहीं की थी ,इसलिए मैं इसे लेकर काफी उत्साहित और खुश हूँ।